अमरीका के 47 वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकतन्त्र विरोधी नीतियों का अमरीकी जनता ने कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल 2025 को अमरीका में सात सौ से भी ज्यादा जगहों पर ट्रम्प के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में अमरीका के तीन जन संगठनों–– महिला मार्च, ब्लैक लाइव्स मैटर और अमरीकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) ने बढ़–चढ़कर हिस्सा लिया।

पद सम्भाले सात दिन की छोटी सी अवधि में ही ट्रम्प ने एक के बाद एक जन–विरोधी फैसलों की झड़ी लगा दी। चुनाव से पहले ही उन्होंने अपना लोकतन्त्र विरोधी चेहरा दिखा दिया था। रीयल स्टेट कम्पनी और कई जुआखानों के मालिक ट्रम्प द्वारा मेडिकल और स्कूल जैसी सामाजिक सुरक्षा के खर्चों में कटौती, अप्रवासी नागरिकों को भगाने के फरमान, मेक अमरीका ग्रेट अगेन (मागा) का नारा, पेरिस जलवायु समझौते से और विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर निकालना, मैक्सिकन सीमा पर आपातकाल की घोषणा करना, दूसरे देशों की सहायता पर रोक आदि कदम उठाकर वे लगाकर अमरीका को फिर से महान बनाने के लिए आतुर हैं।

‘मेक अमरीका ग्रेट अगेन’ का चमत्कारी नारा उन अमरीकी नागरिकों के गले नहीं उतर रहा जो लोकतान्त्रिक चेतना से सम्पन्न हैं। वे विरोध दर्ज करा रहे हैं। मानवाधिकार अभियान वकालत समूह के अध्यक्ष केली रॉबिन्सन कहते हैं, “हम जो हमले देख रहे हैं, वो सिर्फ राजनीतिक नहीं हैं। वे व्यक्तिगत भी हैं। वे हमारी किताबों पर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिश कर रहे हैं, वे एचआईवी रोकथाम निधि में कटौती कर रहे हैं, वे हमारे डॉक्टरों, हमारे शिक्षकों, हमारे परिवारों और हमारी जिन्दगी को शिकार बना रहे हैं।” रॉबिन्सन ने कहा, “हम यह अमरीका नहीं चाहते हैं। हम वह अमरीका चाहते हैं जिसके हम हकदार हैं, जहाँ सम्मान, सुरक्षा और स्वतन्त्रता हममें से कुछ लोगों की नहीं, बल्कि हम सभी की हो।”

वॉशिंगटन में एक प्रदर्शनकारी का बयान है, “ट्रम्प ने हमारे लोकतन्त्र और कानून के शासन को कमजोर करने की कोशिश की है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” न्यूयॉर्क में प्रदर्शनकारियों ने “अमरीका में कोई राजा नहीं” और “तानाशाही का विरोध करो” जैसे नारे लगाये। सैकड़ों लोग एलजीबीटी समुदाय पर ट्रम्प के हमलों का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे। एक प्रदर्शनकारी, सारा हार्वे ने कहा, “हम अपना देश खो रहे हैं।”

अमरीका के अलावा ट्रम्प की नीतियों के विरोध में यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, मेक्सिको, नीदरलैण्ड्स और पुर्तगाल में भी प्रदर्शन हुए। एक तरफ सोशल मीडिया पर ये प्रदर्शन खूब वायरल हुए, दूसरी तरफ अमरीका की मुख्य मीडिया ने इन प्रदर्शनों को जगह नहीं दी। फॉक्स न्यूज ने तो ट्रम्प प्रशासन की नीतियों का समर्थन किया, प्रदर्शनकारियों की आलोचना की। वहीं ट्रम्प के समर्थकों ने प्रदर्शनकारियों को अमरीका विरोधी, विकास विरोधी और देश के लिए खतरा बताया।

पहले कार्यकाल में भी डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ कई आन्दोलनों और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन हुआ था, जैसे–– महिला मार्च। यह प्रदर्शन 21 जनवरी 2017 को हुआ था, ट्रम्प के पहली बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के एक दिन बाद। इस मार्च में लाखों महिलाओं ने भाग लिया और महिलाओं के अधिकारों, आप्रवासन नीतियों और अन्य सामाजिक मुद्दों पर ट्रम्प की नीतियों का विरोध किया। जनवरी 2017 में ही ‘मुस्लिम बैन विरोध प्रदर्शन’ हुआ जब ट्रम्प प्रशासन ने कुछ मुस्लिम–बहुल देशों के नागरिकों के अमरीका में प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगाया था। अप्रैल 2017 में ‘क्लाइमेट मार्च’, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर ट्रम्प प्रशासन की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। ‘फैमिली सेपरेशन प्रोटेस्ट’ 2018 में, ट्रम्प प्रशासन की आप्रवासन नीतियों के तहत बच्चों को उनके माता–पिता से अलग करने के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। ‘ब्लैक लाइव्स मैटर आन्दोलन’ 2020 में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद, नस्लीय अन्याय और पुलिस की बर्बरता के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

इन प्रदर्शनों में ट्रम्प प्रशासन की नीतियों और प्रतिक्रियाओं का भी विरोध किया गया। पर आन्दोलनकारियों को देश–विरोधी, विकास विरोधी बताने वाली मीडिया और जनता वहाँ नदारद थी। पूँजीवाद के असमाधेय संकट ने अमरीका में भी फासीवाद के समर्थक तैयार किये हैं। वहाँ भी विरोध करने वालों को ‘देशद्रोही’ कहने वालों की संख्या बढ़ी है।

पर जितनी जल्दी और तीखी प्रक्रिया अमरीकी जनता से मिली है उससे उम्मीद है कि ट्रम्प का लोकतन्त्र विरोधी फासीवादी मंसूबा आसानी से पूरा नहीं होने वाला। अमरीकी जन संगठनों की आज भले ही कुछ कमजोरियाँ हैं, उनकी एकता में कई तरह की बाधाएँ हैं। सक्षम नेतृत्व और क्रान्तिकारी विचारधारा के बिना ट्रम्प की फासीवादी सत्ता से संघर्ष करना आसान न होगा। फिर भी उम्मीद है कि अमरीकी जनता समय रहते लोकतान्त्रिक मूल्यों, विविधता, समानता और समावेशी योजनाओं में लगी खरोंचों की मरम्मत जरूर कर लेगी। दुनिया भर की प्रगतिशील ताकतें अमरीकी जनता की इस लड़ाई में सहयोग की भूमिका निभायेंगी।

–– राजेश चैधरी