अनियतकालीन बुलेटिन

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अंक 47, जनवरी 2025

संपादकीय

ट्रम्प की वापसी: नवउदारवादी दौर का नवफासीवादी उभार

ट्रम्प का नवफासीवादी आचरण डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरी बार अमरीकी राष्ट्रपति चुने जाने के बाद वहाँ की राजनीति में नवफासीवादी उभार की चर्चा फिर से गर्म हो गयी। 2016 के अपने पहले चुनाव अभियान से लेकर इस चुनाव तक ट्रम्प ने जो बयानबाजियाँ कीं, चुनाव में जिन कुख्यात फासीवादी संगठनों और व्यक्तियों का समर्थन हासिल...

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ब्लॉग

होर्मुज की लहरें कुछ कहती हैं 

होर्मुज, हाँ वही होर्मुज  फारस की खाड़ी का  मात्र  सत्तर किलोमीटर चैड़ा समुद्री गलियारा  जहाँ से दुनिया की …

पश्चिम एशिया संकट की वैश्विक चुनौतियाँ

ईद से ठीक एक दिन पहले ईरान द्वारा जारी किये गये दुनिया के नाम एक कड़े सन्देश में स्पष्ट तौर से कहा गया है कि यह लड़ाई सिर्फ क्षेत्रीय…

हम कॉकरोच हैं

हम कॉकरोच हैं  नौजवान हैं, मचलती हुई सोच हैं निज़ाम के पैरों में आ गई मोच हैं  हम कॉकरोच हैं   बेरोज़गार हैं …

तेल: ईरान युद्ध और मध्य पूर्व के सभी युद्धों के पीछे का असली कारण

ईरान में युद्ध शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, और अब पत्रकारों और राजनेताओं, डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन, वामपंथियों, दक्षिणपंथियों…

अरावली पर्वतमाला पर हमला

पर्यावरण अरावली पर्वतमाला की कोई भी संकीर्ण परिभाषा इस बेहद महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर सकती है, जिसके भूजल, कृषि…

देश विदेश के इस अंक में

जीवन और कर्म

दहशतगर्दी का फर्जी ठप्पा

(मैं मुहम्मद खान हूँ, आतंकवादी नहीं) –– डॉ– जसबीर सिंह औलख क्या कोई संवेदनशील इनसान यह सोच सकता है कि एक सत्रह साल की उम्र के लड़के ने तीन राज्यों में 19 बम धमाके किये होंगे ? पहली नजर में ही आपके दिमाग में ‘यह तो नहीं हो सकता’ का ख्याल आएगा, पर… आगे पढ़ें

मजरूह सुल्तानपुरी : गा मेरे मन गा

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मजरूह सुल्तानपुरी की शख्सियत गजल और गीत के अद्भुत मेल से बनी है। वह एक साथ गजलगो और गीतकार हैं। दोनोे विधाओं को साधना दोधारी तलवार के वार को निहत्थे रोकने जैसा है। उन्होंने जीवन भर हर हमले और प्रहार का डट के सामना किया। उनका मानना है कि खतरा अभी टला नहीं है, बल्कि वह बार–बार… आगे पढ़ें

समाजवादी यथार्थवाद के अलम–बरदार कवि गफूर गुलोम

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मुझे यतनाएँ दी गयीं, क्योंकि मैं एक यहूदी हूँ,  एक संख्या मेरी पहचान बना दी गयी फेंक दिया गया मुझे आग में मुझे यातनाएँ देकर गोली से उड़ा दिया गया मैं एक यहूदी हूँ–––– यह एक गैर यहूदी कवि का साहसपूर्ण बयान है। उस समय का जब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान… आगे पढ़ें

राजनीतिक अर्थशास्त्र

अमरीका में मन्दी की आहट

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–– कुलदीप 2008 में हाउसिंग बुलबुला फूटने से पैदा हुई महामन्दी का जख्म अब नासूर बन गया है। इसने अमरीकी अर्थव्यवस्था को चारों खाने चित कर दिया और उन अर्थव्यवस्थाओं को भी नहीं बख्शा जो प्रत्यक्ष–अप्रत्यक्ष रूप से अमरीकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई थीं और हैं। वैश्वीकरण… आगे पढ़ें

अमरीकी आरोपों ने अडानी की अजेयता के मिथक को कैसे तोड़ दिया

–– परंजॉय गुहा ठाकुरता (यह मामला न केवल अडानी के व्यापारिक साम्राज्य की पड़ताल करता है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके सम्बन्धों की भी जाँच करता है जिन्होंने लगातार इस दिग्गज उद्योगपति के हितों को बढ़ावा दिया है।) यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि गौतम अडानी, उनके… आगे पढ़ें

राजनीति

भँवर में भारत की विदेश नीति

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जब घरेलू मोर्चे पर मोदी की नीतियाँ पिट गयीं और उसके समर्थकों के लिए लोगों का सामना करना मुश्किल हो गया तो विदेशों में भारत का डंका बजने का जुमला चलाया गया। आजकल भारत के शासक अति चतुराई के रोग से पीड़ित लोमड़ियों की तरह पूरी दुनिया में भागदौड़ कर रहे हैं। मीडिया में मोदी की बहुपक्षीय… आगे पढ़ें

भाजपा सदस्यता अभियान की असलियत

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2 सितम्बर को भाजपा ने पार्टी सदस्यता देने के लिए सदस्यता अभियान शुरू किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी पहली सदस्यता लेते हुए कहा कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, 10 करोड़ नये सदस्य बनाकर हम अब नया कीर्तिमान खड़ा करेंगे। भाजपा का यह दूसरा सदस्यता अभियान है। 2014 में भाजपा ने… आगे पढ़ें

साहित्य

जैक लण्डन का उपन्यास ‘आयरन हील’ के बारे में

–– महेन्द्र नेह जैक लण्डन के उपन्यास ‘आयरन हील’ का अनुवाद लाल बहादुर वर्मा जी ने किया है। यह उपन्यास अमरीका के तत्कालीन राजनीति–सामाजिक परिवेश को समझने के लिए एक सूत्र प्रदान करता है। यह जैक लण्डन का सर्वाधिक चर्चित उपन्यास है। आयरन हील 1908 में… आगे पढ़ें

सामाजिक चेतना जगाने में नाटकों की भूमिका : नोबेल विजेता––दारियो लुइगी एंजेलो फो

और पीढ़ियाँ सुनेंगी हमारे कदमों की आवाज–––––– –– गुरबख्श सिंह मोंगा थियेटर न केवल मनोरंजन का साधन है बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का बहुत बड़ा माध्यम है। नाटकों के जरिये प्रवास, पारिवारिक कलह, नैतिक मूल्यों, सत्ता का भ्रष्टाचार… आगे पढ़ें

पर्यावरण

कोप–29 जलवायु शिखर सम्मेलन की असफलता

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24 नवम्बर को जलवायु शिखर सम्मेलन (कोप–29) अजरबैजान के बाकू शहर मे आयोजित हुआ। इसमे दो सौ देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बेशर्मी का आलम यह कि हर बार की तरह इस बार भी एक ऐसे देश ने इस सम्मेलन की मेजबानी की, जो पर्यावरण को बेहद नुकसान पहुँचाता है। कितनी ही बार इस पर… आगे पढ़ें

पराली, प्रदूषण और किसान

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दिल्ली सहित देश के बड़े शहर प्रदूषण की भयानक मार झेल रहे हैं। पीआईबी के अनुसार, “यह समस्या मानसून के बाद और सर्दियों के महीनों में कम तापमान, कम मिश्रण ऊँचाई, विपरीत परिस्थितियाँ और स्थिर हवाओं के कारण प्रदूषकों के ठहर जाने से होती है। इनसे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़… आगे पढ़ें

मूसी रिवरफ्रण्ट डेवलपमेण्ट: विकास के नाम पर आम जनता की बेदखली

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“विकास के नाम पर हम अपनी जड़ों को नष्ट कर रहे हैं, जबकि पीछे छोड़ते हैं केवल इनसानी दुख और समाज पर पड़े घाव।” यह पंक्तियाँ तेलंगाना सरकार द्वारा शुरू किये गये मूसी रिवरफ्रण्ट डेवलपमेण्ट प्रोजेक्ट के कारण हुई जनता की बेदखली के दर्द को जाहिर करने के लिए लिखी गयी थीं।… आगे पढ़ें

विचार-विमर्श

गाजा, भारत, भगत सिंह और साम्राज्यवादी दमन के खिलाफ उग्र विद्रोह का अधिकार

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  ––माइकल डी येट्स गाजा इजराइल ने गाजा की जनता के खिलाफ नरसंहार युद्ध छेड़ दिया है, जिसमें 40,000 से अधिक लोगों की हत्या हुई है और लगातार बमबारी के कारण मलबे के नीचे दबकर इससे कहीं ज्यादा लोग मारे गये हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ का मानना… आगे पढ़ें

अन्तरराष्ट्रीय

ट्रम्प की वापसी : लोकतंत्र, इतिहास, वैश्विक व्यापार और पर्यावरण के लिए चिन्ताजनक

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नाल्ड ट्रम्प अमरीका के राष्ट्रपति का चुनाव जीत कर फिर से व्हाइट हाउस आ गये हैं। पिछले चुनावों में जिन क्षेत्रों में कोई ट्रम्प को पूछने वाला नहीं था इस बार वहाँ भी उनके चाहने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है और उन्होंने बहुमत हासिल किया है। इसे अमरीकी राजनीति में बढ़ते फासीवादी… आगे पढ़ें

सीरिया में तख्तापलट के निहितार्थ

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कैसे किसी देश को साम्राज्यवादी आकांक्षा और पूँजीवादी विस्तारवाद की चपेट में बर्बाद कर दिया जाता है, इसका जीत–जागता उदाहरण सीरिया है। खबर है कि दिसम्बर 2024 के पहले हफ्ते में विद्रोहियों ने बशर अल–असद की सरकार को उखाड़ फेंका। देश कई विद्रोही गुटों और खूँखार विदेशी… आगे पढ़ें

समाचार-विचार

उत्तर प्रदेश चयन सेवा आयोग के प्रतियोगी छात्रों का आन्दोलन

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बीते 5 नवम्बर को उत्तर प्रदेश चयन सेवा आयोग द्वारा समीक्षा अधिकारी (आरओ) और सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) ने परीक्षा से सम्बन्धित एक विज्ञप्ति जारी की। इसमें कहा गया कि ये परीक्षाएँ एक से अधिक पालियों में करायी जाएँगी। आयोग ने सभी पालियों में आयोजित होने वाली परीक्षाओं का सामान्यीकरण… आगे पढ़ें

किराना दुकानदारों की तबाही

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गली–मुहल्ले की किराना दुकानें आस–पास के लोगों के लिए बहुत मायने रखती हैं। आटा, दाल, चीनी, साबुन, तेल, मसाले जैसे रोजमर्रा की जरूरत के सामान और बच्चों को लुभाने वाली लॉलीपॉप, टॉफी, चूरण जैसी चीजें यहाँ हरदम मौजूद रहती हैं। ये दुकानें मुहल्ले के लोगों के मिलने का एक… आगे पढ़ें

देश में बढ़ती असमानता का राजनीतिक अर्थशास्त्र

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विश्व असमानता रिपोर्ट (डब्लूआईएल) में इस साल भी यही उजागर हुआ है कि भारत में अमीरी–गरीबी की खाई और ज्यादा बढ़ गयी है। यह पिछले 23 सालों से सुरसा के मुँह की तरह लगातार बढ़ती जा रही है। 23 मार्च 2024 को फ्रण्टलाइन में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के एक प्रतिशत सबसे… आगे पढ़ें

नेस्ले और यूनिलीवर पिछड़े देशों में बेच रहे कम गुणवत्ता वाले खाद्य सामान

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आज हमारे देश में हर जगह राशन की दुकानें देखने को मिल जाती है, जिनको हम उनमें टंगी रंग–बिरंगी पन्नियाँ देखकर पहचान जाते हैं जो खासतौर से बच्चों को अपनी और आकर्षित करती हैं। इन दुकानों पर मिलने वाले दूसरे सामान हमारी दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी बनते जा रहे हैं। चाहे… आगे पढ़ें

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है इन्टरनेट पर वीडियो देखना

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हाल ही में दिल्ली में प्रदूषण के बुरे हालात को देखते हुए ज्यादातर ऑफिसों मंे काम और स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को ऑनलाइन कर दिया गया। हमारी जिन्दगी में इन्टरनेट कितना शामिल है, यह इसका छोटा–सा नमूना–मात्र है। आज हमें कहीं जाना हो, दवा–सब्जी–खाना–कपड़े… आगे पढ़ें

बहराइच हिंसा में सरकारी साजिश की भनक

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13 अक्टूबर 2024 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हिंसा की लोमहर्षक घटना घटी। जिले के महाराजगंज कस्बे में दुर्गा पूजा की मूर्ति विसर्जन को ले जा रहे समूह और इस इलाके में रहने वाले लोगों के बीच टकराव हुआ। इस घटना ने पूरे इलाके को अपनी आग में बुरी तरह से झुलसा दिया। हिंसा का… आगे पढ़ें

बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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बीते 6 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तरीके से एक आदमी का घर गिराने के चलते उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगायी। इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस चन्द्रचूड़ और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ ने कहा कि नागरिको की आवाज को उनकी सम्पत्ति नष्ट करके नहीं दबाया जा सकता है। यह पहला मामला… आगे पढ़ें

विश्वव्यापी शरणार्थी संकट

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(साम्राज्यवादी व्यवस्था का ढाँचागत संकट दुनिया भर की मेहनतकश जनता को दर–ब–दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर रहा है।) अफ्रीका, मध्य–पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के देशों की बहुत बड़ी आबादी दर–ब–दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। यानी औपनिववेशिक और नव–औपनिवेशिक… आगे पढ़ें

स्वास्थ्य सेवा का निजीकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा

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इस साल की शुरुआत में, 14 जनवरी को बड़े–बड़े प्राइवेट अस्पतालों के मालिकों की चेन्नई में एक बैठक हुई थी। इसकी जो खबरें अखबारों में छपी थीं उनकी भाषा बड़ी लच्छेदार, बहुत प्रभावित करने वाली थी। ऐसा लगता था मानो सारे फाइव स्टार प्राइवेट अस्पतालों के मालिक भारत के लोगों के इलाज… आगे पढ़ें

कविता

जी एन साईबाबा की कविताएँ

(1) हे भिक्षु, मुझे बताओ कि कैसे त्यागा तुमने सांसारिक वस्तुओं को ?   जब तुमने अपने वस्त्र त्यागे तो शानदार रेशमी वस्त्र धारण कर लिये। जब तुमने लालच के विरुद्ध उपदेश देना शुरू किया तो विशाल भूमि पर कब्जा कर लिया और बेशुमार धन इकट्ठा कर लिया। जब तुमने सभी वासनाओं से दूर… आगे पढ़ें