अंक 30, दिसंबर 2018
संपादकीय
सरकार और रिजर्व बैंक में तकरार के निहितार्थ
26 अक्टूबर को मुम्बई में ए डी सर्राफ स्मृति व्याख्यान में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने सरकार और रिजर्व बैंक के बीच पैदा हुई तनातनी के बारे में अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि “जो सरकार अपने केन्द्रीय बैंक का सम्मान नहीं करती वह देर–सबेर वित्तीय बाजार के गुस्से का सामना...
देश विदेश के इस अंक में
सामाजिक-सांस्कृतिक
बढ़ती मानसिक बीमारियाँ लाइलाज होती सामाजिक व्यवस्था का लक्षण
सामाजिक-सांस्कृतिक | विक्रम प्रतापएक व्यक्ति फटे–पुराने चिथड़े में शहर के एक पुल पर खड़ा गालियाँ बके जा रहा था। राहगीर कुछ देर खड़े होकर उसकी गालियाँ सुनते, उत्तेजित होते लेकिन जल्दी ही ऊबकर यह कहते हुए अपनी राह लेते कि पागल है। गाली बकने वाले के मुँह से झाग निकल रहा था और उसके हाथ में एक जंग लगा चिन्दी चाकू… आगे पढ़ें
सबरीमाला मन्दिर में महिलाओं के प्रवेश पर राजनीति
सामाजिक-सांस्कृतिक––दीप्ति इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और हैप्पी टू ब्लीड जैसी संस्थाओं ने मिलकर केरल उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये उस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसके अनुसार 10 से 50 वर्ष की महिलाओं का सबरीमाला मन्दिर में प्रवेश प्रतिबन्धित कर दिया… आगे पढ़ें
राजनीतिक अर्थशास्त्र
आर्थिक संकट के भवर में फँसता भारत
राजनीतिक अर्थशास्त्र | मोहित पुण्डीरअक्टूबर 2018 में अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने विश्व अर्थव्यवस्थाओं से सम्बन्धित ‘ग्लोबल फाइनेन्सियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट’ जारी की। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आयी है जब 2008 की विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी को दस साल पूरे हो चुके हैं और इससे उबरने की बढ़–चढ़कर घोषणाएँ हो… आगे पढ़ें
नोटबन्दी : विफलता और त्रासदी की दास्तान
राजनीतिक अर्थशास्त्र | सीमा श्रीवास्तवआठ नवम्बर को नोटबन्दी की दूसरी बरसी पर अब ये भी साफ हो गया है कि रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने मोदी सरकार को इसकी विफलता के बारे में पहले ही बता दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो साल पहले 8 नवम्बर को रात 8 बजे बड़े–बड़े दावों के साथ जब टेलीविजन पर नोटबन्दी की घोषणा… आगे पढ़ें
राफेल घोटाला : आखिर सच क्या है?
राजनीतिक अर्थशास्त्र | राजेश कुमारराफेल को लेकर पक्ष–विपक्ष में बयान–बाजी जारी है। मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी पहुँच गया है। इस पूरे मामले में विपक्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सीधे शामिल होने की आशंका जता रहा है। दो मुख्य आरोप हैं, पहला 126 विमानों की जगह 36 विमान ही क्यों खरीदे जा रहे हैं?… आगे पढ़ें
विश्वव्यापी महामन्दी के 10 साल
राजनीतिक अर्थशास्त्र | अनुराग मौर्यआज लेहमन ब्रदर्स की दुकान बन्द हुए 10 साल हो गये हैं। 2008 में अमरीका का गृह निर्माण बुलबुला फूट जाने से बाजार धड़ाम से गिर गया था। इस हादसे में 30 लाख अमरीकी बेरोजगार हो गये थे और 50 लाख अमरीकियों ने अपने घर खो दिये थे। बड़े बैंकों के पास खुद के काम करने के लिए डॉलर की कमी हो… आगे पढ़ें
राजनीति
आम चुनाव से पहले देश के सामने वास्तविक समस्या क्या है ?
राजनीति | आनन्द प्रकाशदेश में 2019 में होने वाले आम चुनाव की तैयारी जोरों पर है। चार राज्यों में हो रहे विधान सभा चुनावों को ‘सेमी फाइनल’ कहा जा रहा है। आम चुनाव से पहले वही सब कुछ दोहाराया जा रहा है जो दशकों से दोहराया जाता रहा है। फर्क इतना ही है कि इस बार यह खेल कुछ ज्यादा ही भद्दे… आगे पढ़ें
जर्मनी में नाजी शासन और आइन्स्टीन
राजनीति | बी कुजनेत्सोव18वीं शताब्दी के महान तर्कवादियों ने इस बात का प्रयास किया कि प्रकृति के वस्तुगत औचित्य की तलाश की जाये और उन्होंने पाया कि इसका सरोकार सार्वभौमिक तौर पर कारण–कार्य सम्बन्धों में है–– उस नियतिवाद में है जिससे प्रकृति की परिघटना संचालित होती है। लेकिन वे इससे… आगे पढ़ें
देश में बढ़ती हड़तालें और धरना–प्रदर्शन
राजनीति | अमरपालआज देश में ऐसा कोई राज्य नहीं है जहाँ धरने, प्रदर्शन और हड़तालें न चल रही हों। कहीं मजदूर हड़ताल पर हैं तो कहीं किसान आन्दोलन कर रहे हैं। कहीं शिक्षक और नौजवान धरने–प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं पूर्व सैनिक सड़कों पर हैं। दिल्ली सरकार ने दिल्ली ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (डीटीसी)… आगे पढ़ें
साहित्य
“मैं” और “हम”
साहित्यमैं और मेरी पत्नी मोटर गाड़ी से सान जोक्विन घाटी के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से में, सिंचाई की उन नहरों के किनारे–किनारे घूमे जो खेत मालिकों को सरकारी सहायता पाने में मदद करती हैं। जब कीटनाशकों से हमारा दम घुटने लगा तो हमने अफसोस जाहिर किया कि हवा अशुद्ध होने के कारण पूरब… आगे पढ़ें
कहानी
पराया आदमी
कहानी | इतालो कालविनोएक ऐसा देश था जहाँ के सभी निवासी चोर थे। रात को सभी अपना घर खुला छोड़कर, हाथ में चोर चाबी और मद्धिम रोशनी की लालटेन लेकर अपने पड़ोसियों के घर चोरी करने चले जाते। भोर के वक्त वे अपनी झोली भरकर वापस लौटते और देखते कि उनके घर भी चोरी हो गयी है। इस तरह सब खुशी से रहते, नुकसान में… आगे पढ़ें
श्रद्धांजलि
फहमीदा रियाज का गुजर जाना...
श्रद्धांजलि | सुनीता शर्मा21 नवम्बर को 72 साल की उम्र में हमारी पसन्दीदा शायरा फहमीदा रियाज ने दुनिया को अलविदा कह दिया। वह लम्बे समय से पाकिस्तान के लाहौर में बीमारी से जूझ रही थीं। उनका जन्म 28 जुलाई 1946 को मेरठ में एक साहित्यकार घराने में हुआ था। बाद में वह अपने पिता की नौकरी में तबादले के चलते हैदराबाद… आगे पढ़ें
साक्षात्कार
चे ग्वेरा की बेटी अलेदा ग्वेरा का साक्षात्कार
साक्षात्कार“बहुत कुछ किया जाना बाकी है” ––रॉन ऑगस्टिन (अर्नेस्टो चे ग्वेरा और अलेदा मार्च की बेटी अलेदा ग्वेरा मार्च ने हाल ही में यूरोप की यात्रा की, जहाँ उन्होंने देश के प्रस्तावित संवैधानिक सुधारों के लिए क्यूबा में होने वाले लोकप्रिय परामर्शों को समझाते हुए… आगे पढ़ें
पर्यावरण
आईपीसीसी की जलवायु संकट पर नयी रिपोर्ट: विनाश की ओर बढ़ती मानव जाति
पर्यावरण | सन्देश कुमारजलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों के कारण हमारी धरती और पूरी मानव सभ्यता पर तबाही का खतरा मंडरा रहा है। पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। समुद्र का जलस्तर ऊपर उठ रहा है। पीने का पानी जहरीला होता जा रहा है। भारी वर्षा और सूखा दुनिया भर में तबाही मचा… आगे पढ़ें
बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को रोको नहीं तो दुनिया प्लास्टिक के ढेर में बदल जायेगी
पर्यावरण | सन्देश कुमारआज पीने के पानी से लेकर हमारे शरीर तक में प्लास्टिक के कणों की भारी संख्या में मौजूदगी हमारे लिए गम्भीर खतरा बनती जा रही है। दूध–दही, चीनी, शहद से लेकर अन्य खाद्य सामान प्लास्टिक के पैकेट में पैक होकर आ रहे हैं, जिनमें भारी संख्या में प्लास्टिक के कणों की मौजूदगी से सम्पूर्ण… आगे पढ़ें
मीडिया
फेक न्यूज के शिकंजे में भारत
मीडिया | अजहरझूठी खबर फैलाने की शुरूआत भले ही भाजपा आइटी सेल ने की हो लेकिन अब इस मामले में कोई पार्टी किसी से पीछे नहीं है। कुछ घटनाएँ देखिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शिक्षा को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने कई बार सवाल उठाया है। इसी से जुड़ी खबर को कांगे्रस ने विकृत किया––… आगे पढ़ें
अन्तरराष्ट्रीय
अमरीकी धमकियों के प्रति भारत का रूख, क्या विश्व व्यवस्था में बदलाव का संकेत है?
अन्तरराष्ट्रीय | प्रवीण कुमारअमरीकी धमकियों की परवाह न करते हुए, 5 अक्टूबर को भारत ने रूस के साथ एस–400 मिसाइल की खरीद के समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसके अलावा दोनों देशों ने आठ और समझौतों या सहमति ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किये और भविष्य में दूसरे बहुत से समझौतों के लिए रास्ते खोले। ईरान के मामले में… आगे पढ़ें
क्या लोकतन्त्र का लबादा ओढ़े अमरीका तानाशाही में बदल गया है?
अन्तरराष्ट्रीय––जॉन डब्ल्यू व्हाइटहैड “गरीब और दबे कुचले लोग बढ़ते जा रहे हैं। नस्लीय न्याय और मानवाधिकार बचे नहीं हैं। उन्होंने एक दमनकारी समाज बनाया है और हम सब इच्छा न होते हुए भी उनके साथी हैं। उनका इरादा बचे हुए लोगों की चेतना का सत्यानाश करके शासन करने का है। हमें थपकियाँ… आगे पढ़ें
ब्राजील की लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर धुर दक्षिणपंथी ताकतों का कब्जा
अन्तरराष्ट्रीय | सुनील कुमार मौर्य28 अक्टूबर को ब्राजील में अन्तिम दौर का चुनाव परिणाम आया। इसमें विवादास्पद धुर दक्षिणपंथी नेता जेर बोल्सोनारो की जीत हुई। वामपंथी झुकाव रखने वाली वर्कर्स पार्टी के नेता फर्नाडो हदाद को कुल मतों का 44 प्रतिशत प्राप्त हुआ वहीं बोल्सोनारो को 56 फीसदी मत मिले। 7 अक्टूबर को हुए पहले… आगे पढ़ें
समाचार-विचार
आधार का कोई आधार नहीं
समाचार-विचार | ईशान रवानीआधार की ‘संवैधानिकता और अनिवार्यता’ पर सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। आखिरकार आधार को संवैधानिक घोषित करते हुए उसमें कई फेर–बदल किये गये हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आधार को पैन से जोड़ने का फैसला बरकरार रहेगा, परन्तु अब बैंक खाते को आधार से जोड़ना… आगे पढ़ें
एरिक्सन की सर्वोच्च न्यायालय से अपील : अनिल अम्बानी को देश से बाहर न जाने दें
समाचार-विचार | अजहरअनिल अम्बानी के देश छोड़कर भागने की आशंका जताते हुए एरिक्सन कम्पनी ने सर्वोच्च न्यायालय में एक अपील दायर करके कहा कि अम्बानी पर कड़ी नजर रखी जाये। अनिल अम्बानी की कम्पनी रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) पर लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। देश के पूँजीपतियों द्वारा बैंकों के कर्ज… आगे पढ़ें
कुपोषण से बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन
समाचार-विचार | मोहित पुण्डीरइसी साल जुलाई में पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में हुई तीन बच्चियों की मौत की अटॉप्सी रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि तीनों बच्चियों की मौत भूख और कुपोषण के कारण हुई थी। भूख और कुपोषण से मौत का यह सिलसिला बादस्तूर जारी है। मध्यप्रदेश के सतना जिले में दो दशकों से भी अधिक… आगे पढ़ें
गुजरात में उत्तर भारतीय मजदूरों पर हमले
समाचार-विचार | अजय गुप्तागुजरात में यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश के मजदूरों को लगातार हमले का निशाना बनाया जा रहा है, ये घटनाएँ गुजरात के साबरकंठा जिले में 14 महीने की एक बच्ची के साथ हुए बलात्कार के बाद शुरू हुर्इं। आरोपी रविन्द्र साहू बिहार का निवासी था, उसे घटना के 24 घण्टे के अन्दर ही गिरफ्तार कर लिया… आगे पढ़ें
जड़ी–बूटियों की लूट का धंधा
समाचार-विचार | आलोक पाठकउत्तराखंड को हर्बल प्रदेश बनाने दावे कितने खोखले और हवाई हैं इसे प्रदेश में जड़ी–बूटी उत्पादन की जमीनी हकीकत को देखकर बहुत आसानी से समझा जा सकता है। उत्तराखंड प्रदेश में मुख्यत: दो तरह की जड़ी–बूटियाँ होती हैं, एक उगायी जाने वाली और दूसरी जंगलों में पायी जाने वाली।… आगे पढ़ें
दिल्ली सफाई कर्मचारियों की हड़ताल
समाचार-विचार | राजकमलपूर्वी दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारी 27 दिन तक हड़ताल पर थे। नगर निगम में 40 हजार सफाई कर्मचारी काम करते हैं। 2015 से अब तक सफाई कर्मियों की आठ हड़तालें हो चुकी हैं। इस बार हड़ताल लम्बी चली। जिसके चलते उनकी चार माँगों में से एक माँग दिल्ली सरकार ने मान ली है। जो सफाई कर्मचारी… आगे पढ़ें
देश के बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में
समाचार-विचारमध्य प्रदेश के अलीराज जिले के गिराला गाँव में झगेले अपनी पत्नी फूला के साथ रहता है, उसके तीन बच्चे हैं। जिनमें एक बच्चा पूरी तरह से कुपोषित है और 15 दिन की लड़की के शरीर पर कपड़े़ के नाम पर फटा बिस्तर मात्र है। उसी गाँव में बच्चों का वजन करने पर पाया गया कि 398 बच्चों का वजन औैसत… आगे पढ़ें
न्यूज चैनल : जनता को गुमराह करने का हथियार
समाचार-विचारदेश की प्रगति के लिए समाचार पत्र–पत्रिकाओं के साथ–साथ न्यूज चैनलों की भी अहम भूमिका होती है। इनका काम जनता के सामने सही चीजों को पेश करना होता है। लेकिन आज ये अपनी मुख्य भूमिका को भूलकर जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। याद कीजिए वर्ष 2014 को जब चैनलों पर पानी… आगे पढ़ें
बहुमंजिली इमारत से गिरकर मरते मजदूर
समाचार-विचार | कोमलक्या आपने कभी शहतूत देखा है जहाँ गिरता है, उतनी जमीन पर उसके लाल रस का धब्बा पड़ जाता है, गिरने से ज्यादा पीड़ादायी कुछ नहीं, मैंने कितने मजदूरों को देखा है इमारतों से गिरते हुए, गिर कर शहतूत बन जाते हुए। ––सबीर हका (ईरान के मजदूर कवि) हाल ही में नोएडा सेक्टर–94… आगे पढ़ें
बेघरों के देश में तब्दील होता ब्रिटेन
समाचार-विचार | कोमलतीसरी दुनिया के गरीब देशों में लोगों का बेघर होना या फुटपाथों और रैन बसेरों में जिन्दगी काटना आम बात है। लेकिन दुनिया के सरताज देशों की जनता बेघर होने लगे तो यह बेहद गम्भीर मामला बन जाता है। पिछले कुछ सालों में लन्दन की गलियाँ रंग–बिरंगे तम्बुओं से भर गयी हैं। मन्दी के… आगे पढ़ें
सर्वउपयोगी प्रवासी मजदूर
समाचार-विचार | राजेश कुमारभारतीय शहरों में लम्बे समय से ‘बाहरी लोग’ विरोधाभास के साथ रहते आये हैं, जिनमें ज्यादातर अर्द्धकुशल और अकुशल गरीब प्रवासी मजदूर हैं, जो विभिन्न तरह की सेवाएँ प्रदान करते हैं। स्थानीय राजनेता उन्हें बढ़ती बेरोजगारी और अपराध के बढ़ते ग्राफ के लिए दोषी ठहरा सकते हैं,… आगे पढ़ें