समाचार: साहित्य
पढ़ने की राजनीति
Originally published: Simplifying Socialism on June 12, 2026 by A. J. Horn (more by Simplifying Socialism) (Posted Jun 15, 2026) पढ़ने की क्रिया केवल आँखों से पाठ को पढ़ना या -- यदि आप ऑडियोबुक पसंद करते हैं तो कानों से सुनना ही नहीं है। सही ढंग से किया जाए तो पढ़ना लेखक(ओं) के साथ बौद्धिक संवाद के माध्यम से बेहतर समझ प्राप्त करने की कला है। प्राथमिक स्तर से आगे पढ़ने का क्या अर्थ है, यह समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि जो कोई भी शैक्षणिक संस्थान से बाहर स्वयं से नई चीजें सीखना चाहता है, उसे पढ़ने के माध्यम से ही अंतर्दृष्टि प्राप्त करनी होगी। एआई या अन्य शॉर्टकट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है; यदि कोई सतही जानकारी से अधिक कुछ प्राप्त करना चाहता है , यानी यदि वह सच्ची अंतर्दृष्टि प्राप्त करना चाहता है, तो उसे सही ढंग से पढ़ने का प्रयास करना होगा।...
आगे पढ़ें..गेहूँ बनाम गुलाब
गेहूँ हम खाते हैं, गुलाब सूँघते हैं। एक से शरीर की पुष्टि होती है, दूसरे से हमारा मानस तृप्त होता है। गेहूँ बड़ा या गुलाब? हम क्या चाहते हैं—पुष्ट शरीर या तृप्त मानस? या पुष्ट शरीर पर तृप्त मानस! जब मानव पृथ्वी पर आया, भूख लेकर। क्षुधा, क्षुधा; पिपासा, पिपासा। क्या खाए, क्या पीए? माँ के स्तनों को निचोड़ा; वृक्षों को झकझोरा; कीट-पतंग, पशु-पक्षी—कुछ न छूट पाए उससे! गेहूँ—उसकी भूख का क़ाफिला आज गेहूँ पर टूट पड़ा है! गेहूँ उपजाओ, गेहूँ उपजाओ, गेहूँ उपजाओ! मैदान जोते जा रहे हैं, बाग़ उजाड़े जा रहे हैं—गेहूँ के लिए! बेचारा गुलाब—भरी जवानी में कहीं सिसकियाँ ले रहा है! शरीर की आवश्यकता ने मानसिक प्रवृत्तियों को कहीं कोने में डाल रखा है, दबा रखा है। किंतु; चाहे कच्चा चरे, या पकाकर खाए—गेहूँ तक पशु और मानव में क्या अंतर? मानव को मानव बनाया गुलाब ने!...
आगे पढ़ें..हिंदी में अच्छा लेख कैसे लिखें?
हिंदी में लेख लिखना एक कला है जिसे समय लगाकर और अभ्यास के साथ सीखा जा सकता है। कहावत है-- "करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान / रसरी आवत-जात ते सिल पर पड़त निशान।” नये प्रशिक्षु लेखकों को इस सामग्री को ध्यान से पढ़ना चाहिए और इस पर अमल करना चाहिए। 1. जरूरी उपकरण: एक अच्छा लेख लिखने के लिए आपको कुछ बुनियादी उपकरणों की जरूरत होती है, जैसे कि मोबाइल या लैपटॉप, एक अच्छा कीबोर्ड और कॉपी-कलम। सबसे जरुरी चीज है-- रचनात्मक दिमाग का होना और पर्याप्त समय। 2. सामग्री खोजना: आपको इंटरनेट, अखबार और पत्रिकाओं की मदद से अपने विषय से सम्बन्धित सामग्री जुटानी चाहिए। अगर आप कठिन श्रम करके सामग्री नहीं जुटाते तो आपका लेख उथला रहेगा और उसमें दम नहीं होगा तथा वह वस्तुगत सच को पूरी तरह प्रतिबिम्बित नहीं करेगा। सामग्री प्रमाणित स्रोतों से ही जुटायें ताकि लेख में विश्वसनीयता और गहराई बनी रह सके।...
आगे पढ़ें..गोदान उपन्यास का सारांश
गोदान, प्रेमचन्द का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है। कुछ लोग इसे उनकी सर्वोत्तम कृति भी मानते हैं। इसका प्रकाशन 1936 ई० में हिन्दी ग्रन्थ रत्नाकर कार्यालय, बम्बई द्वारा किया गया था। इसमें भारतीय ग्राम समाज एवं परिवेश का सजीव चित्रण है। गोदान ग्राम्य जीवन और कृषि संस्कृति का महाकाव्य है। इसमें प्रगतिवाद, गांधीवाद और मार्क्सवाद (साम्यवाद) का पूर्ण परिप्रेक्ष्य में चित्रण हुआ है। गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं, ऐसी संस्कृति जो अब समाप्त हो रही है या हो जाने को है, फिर भी जिसमें भारत की मिट्टी की सोंधी सुबास भरी है। प्रेमचंद ने इसे अमर बना दिया है। उपन्यास का सारांश गोदान प्रेमचंद का हिंदी उपन्यास है जिसमें उनकी...
आगे पढ़ें..एक सुलझा आदमी
बहुत लोग पूछंते हैं कि मेरी दृष्टि इतनी साफ कैसे हो गयी है और मेरा व्यक्तित्व ऐसा सरल कैसे हो गया हैं। बात यह है कि बहुत साल पहले ही मैंने अपने-आपसे कुछ सीधे सवाल किये थे। तब मेरी अंतरात्मा बहुत निर्मल थी-शेव के पहले के कांच जैसी। कुछ लोगों की अंतरात्मा बुढापे तक वैसी ही रहती है, जैसी पैदा होते वक्त। वे बचपन में अगर बाप का माल निसंकोच खाते हैं, तो सारी उम्र दुनिया भर को बाप समझ-कर उसका माल निसंकोच मुफ्त खाया करते हैं। मेरी निर्मल आत्मा से सीधे सवालों के सीधे जबाब आ गये थे, जैसे बटन दबाने से पंखा चलने लगे। जिन सवालों के जवाब तकलीफ दें उन्हें टालने से आदमी सुखी रहता है। मैंने हमेशा सुखी रहने की कोशिश की है। मैंने इन सवालों के सिवा कोई सवाल नहीं किया और न अपने जवाब बदले। मेरी सुलझो...
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