बीते 5 नवम्बर को उत्तर प्रदेश चयन सेवा आयोग द्वारा समीक्षा अधिकारी (आरओ) और सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) ने परीक्षा से सम्बन्धित एक विज्ञप्ति जारी की। इसमें कहा गया कि ये परीक्षाएँ एक से अधिक पालियों में करायी जाएँगी। आयोग ने सभी पालियों में आयोजित होने वाली परीक्षाओं का सामान्यीकरण करने का फैसला किया है। बताते चलें कि अलग–अलग पालियों में होने वाली परीक्षाओं की कठिनता का स्तर अलग–अलग होने के कारण, इन्हें समान स्तर पर लाने की प्रक्रिया को, सामान्यीकरण कहा जाता है। सामान्यीकरण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इस प्रक्रिया से छात्र नाखुश हैं। इन दोनों फैसलों की विज्ञप्ति मिलते ही छात्र आक्रोश में आ गये और छात्रों ने आयोग के खिलाफ आन्दोलन करने का फैसला किया। दरअसल, छात्रों का कहना है कि सामान्यीकरण के सूत्र सन्देहास्पद हैं।

10 नवम्बर आते–आते, प्रयागराज में आयोग के कार्यालय के सामने हजारों की संख्या में छात्र इकट्ठा होने लगे और देखते ही देखते आन्दोलन ने एक बड़ा रूप ले लिया। छात्रों के आन्दोलन को बढ़ता देख पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्ज किया और उन्हें घटनास्थल से खदेड़ने की नाकाम कोशिश की। पुलिस के इस दमनकारी रवैये ने अन्य छात्रों में गुस्सा भर दिया। प्रयागराज से आगे बढ़ते हुए यह आन्दोलन लखनऊ समेत अन्य जगहों में भी फैल गया। लखनऊ में बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रयागराज आन्दोलन के समर्थन में एक रैली निकाली। इस समर्थन को बढ़ता देख प्रदेश सरकार ने बीएनएस की धारा 163 लागू कर धरना प्रदर्शन पर रोक लगाने की कोशिश की। डरी हुई सरकार ने 10 से ज्यादा आन्दोलनकारी छात्रों को जेल में डाल दिया।

दरअसल, यह परीक्षा 2024 के फरवरी माह में आयोजित की गयी थी, लेकिन इस परीक्षा में पेपर लीक होने की खबर आयी। पेपर सोशल मीडिया और कुछ परीक्षा केन्द्रों के जरिये लीक किया गया था। छात्रों ने खुद पेपर लीक के पुख्ता सबूत इकट्ठा किये थे। इसके बाद छात्रों ने धरना–प्रदर्शन और सोशल मीडिया के जरिये इसके खिलाफ एक मुहिम छेड़ दी। लेकिन पक्के सबूत के बावजूद सरकार यह मानने को तैयार नहीं हुई कि पेपर लीक हुआ है। आखिरकार, सरकार को छात्र आन्दोलन के सामने घुटने टेकने पड़े और पेपर लीक होने की बात स्वीकार करनी पड़ी।

भयावह बेरोजगारी, कोचिंग संस्था की ऊँची फीस,  किराये पर कमरा और भोजन की महँगी व्यवस्था मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग से आये छात्रों की कमर तोड़ देती है। ऐसी स्थिति में घटती भर्तियाँ और उसके बाद पेपर लीक से छात्रों की उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। उनका कहना यह है कि सरकार एक से अधिक पलियों में परीक्षा आयोजित करा के सामान्यीकरण के जरिये अपने कुछ खास लोगों को फायदा पहुँचाने की कोशिश कर रही है। जो हाजिर है उसमें हुज्जत क्या ? हम सभी ने देखा कि हाल ही में एक बड़े धर्मगुरु ने खुले मंच से प्रदेश सरकार में बड़े पद पर विराजमान भाजपा नेता से अपने परिचित को समीक्षा अधिकारी (आरओ) पद पर नौकरी देने का आग्रह भी किया है।

इस बार सरकार की मनमानी के खिलाफ छात्र आन्दोलन पर डटे रहे, लेकिन सरकार ने आन्दोलन करने के लिए छात्रांे पर झूठे केस दर्ज कर दिये। दृष्टि आयीएएस कोचिंग संस्था ने छात्रों पर एफआयीआर कर आरोप लगाया कि छात्रों ने उसके प्रचार बोर्ड को फाड़ दिया था। इस कोचिंग संस्था का मालिक सरकार के साथ खड़ा नजर आ रहा है। इससे नौजवान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

आज नौजवान अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ आन्दोलन करने को मजबूर है। अभी कुछ दिन पहले यूपी पुलिस और नीट की परीक्षा के पेपर लीक होने के खिलाफ भी नौजवान सड़कों पर थे। नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ चयन सेवा आयोग भी पीछे नहीं है। यह आयोग प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाली प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा के अन्तर्गत आने वाली विभिन्न भर्तियों की परीक्षाएँ नियमित रूप से करा पाने में अक्षम दिखायी पड़ता है। इन सभी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र धीरे–धीरे सरकार में अपना विश्वास खोते जा रहे हैं। कहीं पेपर लीक के खिलाफ तो कहीं सरकारी नौकरियों में ठेका प्रथा के खिलाफ ये आन्दोलन तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसी स्थिति में अगर सरकार प्रदेश के नौजवानों की माँगों को स्वीकार नहीं करती और उनको लाठी–डण्डों से पिटती है तो भविष्य में यही नौजवान अपनी सरकार का गुरूर तोड़ भी सकते हैं। यह बात सरकार को याद रखनी चाहिए।

–– नदीम