अनियतकालीन बुलेटिन

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अंक 1, मार्च 2011

संपादकीय

बर्बरों का इन्तजार

कवि सी. पी. कवाफी की एक कविता का शीर्षक है– बर्बरों का इन्तजार। कविता रोम के आर्थिक–राजनीतिक–सामाजिक–सांस्कृतिक–सामरिक– सम्पूर्ण पतन के काल से सम्बन्धित है। कुलीन रोमनों के पास रोम को आगे ले जाने के लिए कोई कार्यसूची नहीं थी। उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। वे किंकर्त्तव्यविमूढ़ थे कि क्या करें ? भोग–विलासिता, अकर्मण्यता,...

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